बिहार में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ है। 20 साल बाद नीतीश कुमार फिर केन्द्र की राजनीति में आएंगे। निमुख्यमंत्री का पद छोड़ेंगे। गुरुवार को नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरा। साथ में मौजूद थे, भाजपा नेता अमित शाह। अब सवाल है, बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन बनेगा? नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री होगी। ऐसी खबर है कि निशांत कुमार बिहार विधान परिषद के सदस्य बनेंगे और राज्य के उपमुख्यमंत्री बनेंगे।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा है, "सब जानते हैं कि बिहार के चुनाव में NDA ने ये नारा दिया था कि '2025 से 30 फिर से नीतीश'... उस समय हमने कहा था कि भाजपा के लोगों ने नीतीश कुमार को 'हाईजैक' कर लिया है और उन्हें दोबारा कुर्सी पर बैठने नहीं देंगे। हमने कहा था कि वे 6 महीने से ज्यादा कुर्सी पर नहीं रहेंगे... भाजपा जिसके साथ भी रही है उसे बर्बाद करने का काम किया है। भाजपा 'रबड़ स्टांप मुख्यमंत्री' चाहती है.. ये जो सत्ता परिवर्तन हो रहा है, ये जन भावनाओं के खिलाफ है।”
मेरा मानना है, नीतीश कुमार भारतीय राजनीति के वो जादूगर हैं, जो हर बार अपने खेल से चौंकाते हैं। ये सही है कि उनका स्वास्थ्य ऐसा नहीं है कि बिहार जैसे बड़े राज्य की जिम्मेदारी ज्यादा समय तक संभाल पाएं लेकिन ये भी सही है कि बिहार में मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग नीतीश कुमार के साथ है।
नीतीश जो भी हों, जैसे भी हों, आज भी जद-यू के पास उनका विकल्प नहीं है। इसीलिए जद-यू के नेताओं को लगता है कि नीतीश के बेटे को उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर खड़ा किया जा सकता है। नीतीश कुमार केंद्र में मंत्री बनकर रहें, ये बीजेपी को भी सूट करता है क्योंकि नीतीश के बेटे इतने अनुभवी नहीं हैं कि पहले ही दिन मुख्यमंत्री बन जाएं।
निशांत डिप्टी सीएम रहकर अनुभव हासिल करेंगे और बीजेपी को अपना मुख्यमंत्री मिल जाएगा। न तुम हारे, न हम हारे, तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय। लेकिन इस बात को भूलना नहीं चाहिए कि नीतीश कुमार सरप्राइज देने में माहिर हैं। (रजत शर्मा)
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